Molela Kala (मोलेला टेराकोटा कला राजस्थान): History, GI Tag & Complete Guide
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1. मोलेला का संबंध किस कला से है? (What Art is Molela Associated With?)
प्रतियोगी परीक्षाओं (RPSC, REET, CET, RAS) और भारतीय हस्तशिल्प के अध्ययन में अक्सर यह प्रश्न पूछा जाता है: "मोलेला का संबंध किस कला से है?" या "राजस्थान में टेराकोटा कहां की प्रसिद्ध है?" इसका सीधा उत्तर है—मोलेला (राजसमंद) का संबंध टेराकोटा कला (Terracotta Clay Art / मृण्मूर्ति शिल्प) से है।
आग में पकाई गई लाल-भूरे रंग की मिट्टी की कलाकृतियों को टेराकोटा (Terracotta) कहा जाता है। मोलेला के कुम्हार कलाकार बनास नदी के पास के तालाब (सोलाकिया तालाब) की चिकनी काली और पीली मिट्टी में गधे की लीद (Donkey Dung) मिलाकर हाथ से खोखली मूर्तियां (Khokhla / Pola Relief Plaques) बनाते हैं। इसे खुले भट्ठे (Bhatti) में 800°C से 900°C तापमान पर पकाया जाता है।
2. मोलेला गांव क्यों प्रसिद्ध है और इसका इतिहास क्या है? (Why is Molela Village Famous?)
किंवदंती के अनुसार लगभग 800 वर्ष पूर्व भगवान धर्मराज (देवनारायण जी) ने एक दृष्टिहीन कुम्हार अंधकुमार (Andhkumar) को स्वप्न में दर्शन देकर अपनी मिट्टी की मूर्तियां बनाने का आदेश दिया और उसकी आंखों की रोशनी लौटा दी। तभी से मेवाड़, गुजरात और मालवा के भील, गुर्जर, मीणा और गाडरी समुदाय हर वर्ष माघ महीने में अपने पुजारियों (भोपा) के साथ मोलेला आकर देवनारायण जी, ताकाजी (नाग देवता) और भैरव जी के नए फलक (देवरा) ले जाते हैं।
अन्य मिट्टी के बर्तनों के विपरीत, मोलेला क्ले वर्क में चाक (Wheel) या सांचे (Mould) का उपयोग नहीं होता। कलाकार जमीन पर मिट्टी की पट्टी (फलक) बिछाकर हाथ की उंगलियों और तीन पारंपरिक औजारों—भलाड़ी (Bhaldi), पिंडी (Pindi) और पटिया—से उभारदार आकृतियां गढ़ते हैं।
3. प्रमुख कलाकार: पद्मश्री मोहनलाल कुम्हार एवं दिनेश चंद्र कुम्हार
मोलेला की इस लोक कला को मंदिरों के देवरा से निकालकर आधुनिक वास्तुकला (Architectural Wall Murals), संग्रहालयों और अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों तक पहुंचाने का श्रेय [पद्मश्री मोहनलाल कुम्हार (Padma Shri Mohan Lal Kumhar)](/artists/mohan-lal-kumhar/) को जाता है। उन्हें राष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रीय पुरस्कार, शिल्प गुरु और 2012 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया।
आज इस 15 पीढ़ियों की विरासत को राष्ट्रीय योग्यता पुरस्कार विजेता [दिनेश चंद्र कुम्हार (Dinesh Chandra Kumhar)](/artists/dinesh-chandra-kumhar/), श्रीमती कैलाश देवी, उमेश कुम्हार और मोहित कुम्हार मोलेला गांव के अपने स्टूडियो में जीवित रखे हुए हैं।
Frequently Asked Questions
Questions & Answers about Molela Clay Work
Key insights into the sacred origin, traditional techniques, and cultural significance of Molela terracotta.
मोलेला का संबंध किस कला से है? (Molela ka sambandh kis kala se hai?)
मोलेला (जिला राजसमंद, राजस्थान) का संबंध टेराकोटा कला (Terracotta Art / पकी हुई मिट्टी की मृण्मूर्ति कला) से है। यहां बनास नदी के तालाब की मिट्टी में गधे की लीद मिलाकर बिना सांचे के हाथ से खोखली उभारदार मूर्तियां (Hollow-Relief Plaques) और दीवार भित्तिचित्र (Wall Murals) बनाए जाते हैं।
राजस्थान में टेराकोटा कहां की प्रसिद्ध है? (Where is terracotta famous in Rajasthan?)
राजस्थान में टेराकोटा कला के लिए राजसमंद जिले का मोलेला गांव (Molela Village, Rajsamand) सबसे प्रसिद्ध है (GI Tag प्राप्त)। इसके अलावा जालोर का हरजी गांव (मामाजी के घोड़े) और नागौर का बुनरावता भी मिट्टी के शिल्प के लिए जाने जाते हैं।
मोलेला टेराकोटा कला के प्रसिद्ध कलाकार कौन हैं?
मोलेला टेराकोटा कला के सबसे प्रसिद्ध कलाकार स्वर्गीय पद्मश्री मोहनलाल कुम्हार (Padma Shri Mohan Lal Kumhar) हैं, जिन्हें 2012 में पद्मश्री और शिल्प गुरु सम्मान मिला। वर्तमान में उनके पुत्र दिनेश चंद्र कुम्हार (Dinesh Chandra Kumhar) इस कला के प्रमुख राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त मास्टर कलाकार हैं।
मोलेला गांव कहां स्थित है और इसका पिन कोड क्या है?
मोलेला गांव राजस्थान के राजसमंद जिले की खमनोर तहसील में स्थित है (Molela PIN Code: 313322)। यह नाथद्वारा श्रीनाथजी मंदिर से 15 किमी, हल्दीघाटी से 12 किमी और उदयपुर से 45 किमी उत्तर में स्थित है।
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